ध्यान कुछ ऐसा नहीं के किसी के चरणों में जा गिरे और समर्पित हो गए| ध्यान का मतलब है होश में जीना| देखना अपने मन के गतिविधियोंको| भय, क्रोध, इर्षा और इतर सभी मनोआवेगोंको देखना ही ध्यान है| यह ध्यान कभी भी और कही भी हो सकता है| ध्यान के लिए किसी खास जगह या शांति की जरुरत नहीं है| ध्यान के लिए किसी गुरु या किसी विधि की भी जरुरत नहीं है| ध्यान को किसी भी क्रिया के साथ आप जोड़ सकते है|
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