क़ुछ कठिन नहि है, ना हि कुछ रहस्य है|
व्यक्ती जी रहा है अतित मे या तो भविष्य मे|
यहि उसके दुःख का कारण है|
दुःख का अर्थ केवल इतनाहि है, पुराने घाव कुरेदना, या भविष्य कि चिंता करना और कुछ् कारण नहि है दुःख का|
जितने क्षण होश मे जिओगे दुःख से मुक्त रहोगे|
और केवल दुःख से हि नहि बल्कि समस्त मानसिक बिमारियोंसे भी दुर रहोगे|
सारे शास्त्रों का निचोड केवल इतना हि है, के होश से जिये|
जहा भी हो, जैसे भी हो बस होश मे आ जाओ|
अगला जनम पिछला जनम इसकि फिक्र ना करो|
कुंडलिनि चक्र इत्यादि बातो मे मत उलझना|
कौन जागा हुवा है और कौन सोया इसकि चर्चा व्यर्थ है|
अपनी फिक्र कर लो तो बहोत हो गया|
गुरु, शास्त्र और शिविरो मे समय व्यर्थ मत गवाना, बस अभी और यहि जाग कर जिना|
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